जीवन अवधि :- जीवो के जन्म से लेकर उसके प्राकृतिक मृत्यु के समय को उस जीव का जीवन काल या जीवन अवधि कहा जाता है।
कुछ जीवो के जीवन काल वर्षों में
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* हाथी : 65-90
* कुत्ता : 15-20
* गाय : 25-30
* घोड़ा : 30-40
* कछुआ : 100-150
* क्रोकोडाइल : 60
* कौवा : 15
* तोता : 140
* गुलाब : 5-7
* केला : 10-15
* धान : 100-120 दिन
* बरगद : 200
* कबूतर : 18
* टाइगर : 22
* शेर : 35
* खरगोश : 09
जनन या प्रजनन :- जनन एक जैविक प्रक्रिया है ,जिसके माध्यम से सभी जीव अपने वंश एवं प्रजाति की निरंतरता बनाए रखने के लिए अपने सामान जीवो को जन्म देते हैं। जन्म देने वाले जीवो को जनक तथा नए जन्म लेने वाले जीवो को संतान अथवा संतति कहा जाता है यह संतति वृद्धि एवं विकास करने के बाद स्वयं भी नए जीवो को जन्म देती है और अपने वंश एवं प्रजाति का अस्तित्व बनाए रखती है।
जनन के प्रकार :-
संपूर्ण जीव जगत में जनन मुख्यतः दो प्रकार से होता है
1* अलैंगिक जनन
2* लैंगिक जनन
1- अलैंगिक जनन:- अलैंगिक जनन में सिर्फ एक जनक की आवश्यकता होती है। इस प्रकार के जनन में सभी संतति आकारिकी एवं आनुवांशिक रूप से जनक के समान होती है अर्थात एक दूसरे के क्लोन होते हैं।
इस जन्म में सभी विभाजन समसूत्री होते हैं तथा युग्मक निर्माण एवं युग्मक संलयन नहीं होता है। अलैंगिक जनन निम्न श्रेणी के जीवो में पाया जाता है। उच्च कोटि के पादपों में अलैंगिक जनन की एक विधि पाई जाती है जिसे कायिक जनन कहते हैं।
2- लैंगिक जनन :- लैंगिक जनन के लिए एक ही जाति के दो विपरीत लिंग वाले जीवो अथवा जनन अंगों की आवश्यकता होती है । उदाहरण - स्पंज, हाइड्रा, ईस्ट, अमीबा मानव आदि ।
कुछ जीवो के जीवन काल वर्षों में
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* हाथी : 65-90
* कुत्ता : 15-20
* गाय : 25-30
* घोड़ा : 30-40
* कछुआ : 100-150
* क्रोकोडाइल : 60
* कौवा : 15
* तोता : 140
* गुलाब : 5-7
* केला : 10-15
* धान : 100-120 दिन
* बरगद : 200
* कबूतर : 18
* टाइगर : 22
* शेर : 35
* खरगोश : 09
जनन या प्रजनन :- जनन एक जैविक प्रक्रिया है ,जिसके माध्यम से सभी जीव अपने वंश एवं प्रजाति की निरंतरता बनाए रखने के लिए अपने सामान जीवो को जन्म देते हैं। जन्म देने वाले जीवो को जनक तथा नए जन्म लेने वाले जीवो को संतान अथवा संतति कहा जाता है यह संतति वृद्धि एवं विकास करने के बाद स्वयं भी नए जीवो को जन्म देती है और अपने वंश एवं प्रजाति का अस्तित्व बनाए रखती है।
जनन के प्रकार :-
संपूर्ण जीव जगत में जनन मुख्यतः दो प्रकार से होता है
1* अलैंगिक जनन
2* लैंगिक जनन
1- अलैंगिक जनन:- अलैंगिक जनन में सिर्फ एक जनक की आवश्यकता होती है। इस प्रकार के जनन में सभी संतति आकारिकी एवं आनुवांशिक रूप से जनक के समान होती है अर्थात एक दूसरे के क्लोन होते हैं।
इस जन्म में सभी विभाजन समसूत्री होते हैं तथा युग्मक निर्माण एवं युग्मक संलयन नहीं होता है। अलैंगिक जनन निम्न श्रेणी के जीवो में पाया जाता है। उच्च कोटि के पादपों में अलैंगिक जनन की एक विधि पाई जाती है जिसे कायिक जनन कहते हैं।
2- लैंगिक जनन :- लैंगिक जनन के लिए एक ही जाति के दो विपरीत लिंग वाले जीवो अथवा जनन अंगों की आवश्यकता होती है । उदाहरण - स्पंज, हाइड्रा, ईस्ट, अमीबा मानव आदि ।
अलैंगिक जनन की विधियां या प्रकार
जीवो में अलैंगिक जनन अनेक विधियो द्वारा होता है
1. विखंडन ( fission )
इस प्रकार के अलैंगिक जनन मे जनक कोशिका दो या दो से अधिक समान एवं बराबर माप की संतति कोशिकाओं में बंट जाती
द्विखण्डन
इस विधि में एक कोशिका दो समान भागों में विभक्त हो जाती है तथा प्रत्येक भाग वृद्धि करके वयस्क कोशिका (जीव) का निर्माण करता है जो जीव द्विखंडन द्वारा जनन करते हैं उनकी प्रकृति मृत्यु नहीं होती वह हमारे होते हैं जैसे- अमीबा
बहुखंडन (multiple fission)
इस प्रकार के जनन में एक जनन कोशिका द्वारा अनेक संततियों को उत्पन्न किया जाता है ।
Ex- plasmodium, monocistis ,ulothrix
Note 1. बहुखंडन द्वारा होने वाले अलैंगिक जनन में एक जनन कोशिका से लगभग 1000 संतति कोशिकाओं का निर्माण होता है तथा प्रत्येक संतति कोशिका में बहुखंडन विधि के द्वारा पुनः विभाजन करने की क्षमता होती है ।
Note 2. अमीबा भी प्रतिकूल परिस्थितियों में बहुखंडन द्वारा जनन करता है।
बहुखंडन के प्रकार (types of multiple fission)
2. मुकुलन (Budding)
अधिकांश कवक तथा शैवालों में विशेष गतिशील संरचनाओं के द्वारा अलैंगिक जनन होता है जिन्हें चल बीजाणु (zoo spores) कहते हैं चल बीजाणु सूक्ष्म, एककोशिकीय, पतली भित्ति युक्त संरचना होती है यह जलीय जीवो में पाए जाते हैं जैसे - क्लैमीडोमोनास
कुछ बीजाणु अगतिशील होते हैं जिन्हें अचल बीजाणु कहते है। जैसे - ulothrix
4. खंडन (Fragmentation)
इस प्रकार के जनन मे जनक की कोशिका या शरीर दो या अधिक खंडों में टूट जाता है ।तथा प्रत्येक भाग खंड नए जीव की तरह व्यवहार करता है। विखंडन पुराने भागों के सड़ने प्राकृतिक मृत्यु द्वारा होता है ।
जैसे - ulothrix, spirogyra ,bryophytes जैसे riccia ,
,marchantia ।

