Friday, March 20, 2020

जीवो में जनन ( Reproduction in Organisms)

                                                                                          जीवन अवधि :-  जीवो के जन्म से लेकर उसके प्राकृतिक मृत्यु के समय को उस जीव का जीवन काल या जीवन अवधि कहा जाता है।
                     
      कुछ जीवो के जीवन काल वर्षों में
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      * हाथी               :   65-90
      * कुत्ता               :   15-20
      * गाय                :    25-30
      * घोड़ा               :   30-40
      * कछुआ            :   100-150
      * क्रोकोडाइल      :   60
      * कौवा               :   15
      * तोता                :   140
      * गुलाब               :   5-7
      * केला                :    10-15
      * धान                 :    100-120 दिन
      * बरगद              :     200
      * कबूतर             :     18
      * टाइगर             :      22
      *  शेर                 :      35
      * खरगोश           :      09

      जनन या प्रजनन :- जनन  एक जैविक प्रक्रिया है ,जिसके माध्यम से सभी जीव अपने वंश एवं प्रजाति की निरंतरता बनाए रखने के लिए अपने सामान जीवो को जन्म देते हैं। जन्म देने वाले जीवो को जनक तथा नए जन्म लेने वाले जीवो को संतान अथवा संतति कहा जाता है यह  संतति वृद्धि एवं विकास करने के बाद स्वयं भी नए जीवो को जन्म देती है और अपने वंश एवं प्रजाति का अस्तित्व बनाए रखती है।
 जनन के प्रकार :-
 संपूर्ण जीव जगत में जनन मुख्यतः दो प्रकार से होता है
1*  अलैंगिक जनन
2*  लैंगिक जनन
1-  अलैंगिक जनन:-  अलैंगिक जनन में सिर्फ एक जनक की आवश्यकता होती है। इस प्रकार के जनन में सभी संतति आकारिकी एवं आनुवांशिक रूप से जनक के समान होती है अर्थात एक दूसरे के क्लोन होते हैं।
        इस जन्म में सभी विभाजन समसूत्री होते हैं तथा युग्मक निर्माण एवं युग्मक संलयन नहीं होता है। अलैंगिक जनन निम्न श्रेणी के जीवो में पाया जाता है। उच्च कोटि के पादपों में अलैंगिक जनन की एक विधि पाई जाती है जिसे कायिक जनन कहते हैं।
2-  लैंगिक जनन :- लैंगिक जनन के लिए एक ही जाति के दो विपरीत लिंग वाले जीवो अथवा जनन अंगों की आवश्यकता होती है ।  उदाहरण -  स्पंज, हाइड्रा, ईस्ट, अमीबा  मानव आदि । 
   
अलैंगिक जनन की विधियां या प्रकार
जीवो में अलैंगिक जनन अनेक विधियो द्वारा होता है
1. विखंडन ( fission )
 इस प्रकार के अलैंगिक  जनन मे जनक कोशिका दो या दो से अधिक समान एवं बराबर माप की संतति कोशिकाओं में बंट जाती 

द्विखण्डन 

इस विधि में एक कोशिका दो समान भागों में विभक्त हो जाती है तथा प्रत्येक भाग वृद्धि करके  वयस्क कोशिका (जीव) का निर्माण करता है जो जीव  द्विखंडन द्वारा जनन करते हैं उनकी प्रकृति मृत्यु नहीं होती वह हमारे होते हैं जैसे- अमीबा
              द्विखण्डन केे प्रकार
बहुखंडन (multiple fission)
इस प्रकार के जनन में एक जनन कोशिका द्वारा अनेक संततियों को उत्पन्न किया जाता है ।
Ex- plasmodium, monocistis ,ulothrix
Note 1. बहुखंडन द्वारा होने वाले अलैंगिक जनन में एक जनन कोशिका से लगभग 1000 संतति कोशिकाओं का निर्माण होता है तथा प्रत्येक संतति कोशिका में बहुखंडन विधि के द्वारा पुनः विभाजन करने की क्षमता होती है ।
Note 2. अमीबा भी प्रतिकूल परिस्थितियों में बहुखंडन द्वारा जनन करता है।
बहुखंडन के प्रकार (types of multiple fission)
2. मुकुलन (Budding)
3. बीजाणु द्वारा (spores)
अधिकांश कवक तथा शैवालों में विशेष गतिशील संरचनाओं के द्वारा अलैंगिक जनन होता है जिन्हें चल बीजाणु (zoo spores) कहते हैं चल बीजाणु सूक्ष्म, एककोशिकीय,  पतली भित्ति युक्त संरचना होती है यह जलीय जीवो में पाए जाते हैं जैसे - क्लैमीडोमोनास
कुछ बीजाणु अगतिशील होते हैं जिन्हें अचल बीजाणु कहते है। जैसे - ulothrix
4. खंडन (Fragmentation)
इस प्रकार के जनन मे जनक की कोशिका या शरीर दो या अधिक खंडों में टूट जाता है ।तथा प्रत्येक भाग खंड नए जीव की तरह व्यवहार करता है। विखंडन पुराने भागों के सड़ने प्राकृतिक मृत्यु द्वारा होता है ।
जैसे -  ulothrix, spirogyra ,bryophytes जैसे riccia ,
,marchantia ।

Tuesday, October 22, 2019

डीएनए फिंगर प्रिंटिंग

      अलग-अलग मानव के डीएनए के न्यूक्लियोटाइड्स क्रम की तुलना करके उनके बीच संबंध के अध्ययन की प्रक्रिया को डीएनए फिंगर प्रिंटिंग कहते हैं। इसकी खोज एलेक्स जेफरी व उनके सहयोगियों ने 1985 में की। इस विधि का अधिक उपयोग प्राणियों के संबंधों को निश्चित करने के लिए तथा अनेक अपराधों जैसे हत्या बलात्कार आदि की जांच में किया जाता है।
    इस क्रिया में निम्न चरण होते हैं-
1. डीएनए पृथक करना
2. डीएनए काटना
3. जेल इलेक्ट्रोफॉरेसिस
4. प्रोब का VNTRs के साथ बंधना
5. फिंगर प्रिंटिंग

Wednesday, April 24, 2019

प्रमुख भारतीय वनस्पति शास्त्री

* विलियम राक्सवर्ग - भारतीय वनस्पति विज्ञान के जनक
* एस०आर० कश्यप  - भारतीय ब्रायोफाइटा विज्ञान के पिता
* एम०ओ० पी० आयंगर { फाइकोलाजी} - भारतीय आधुनिक शैवाल के पिता
* के०सी० मेहता - पादप रोग
* पी० परीजा - पादप शरीर क्रिया विज्ञान
* वीरबल साहनी - पुरा वनस्पति विज्ञान [ Pelaeobotany ] भारतीय जीवाश्म वनस्पति विज्ञान के पिता
* आर० मिश्रा - पारिस्थितिकी [ Ecology ]
* डा० बी०पी० पाल - पादप प्रजनन
* डा० एम० एस० स्वामीनाथन - पादप आनुवंशिकी [ भारत में हरित क्रांति के जनक ]
* डा० जगदीश चन्द्र बोस - शरीर क्रिया विज्ञानी ।

Tuesday, April 23, 2019

CELL ( कोशिका )

कोशिका :-

*"कोशिका जीवधारियों की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक ईकाइ है ।"
 * कोशिका का अधध्यन कोशाविज्ञान या CYTOLOGY कहलाता है 
 * सर्वप्रथम कोशा 1665 में राबर्ट हुक द्वारा खोजी गयी 
 * स्लाइडेन और शवान ने कोशिका सिद्धांत दिया 
 * स्वतः जनन की क्षमता कोशिका की विशेषता है 
 * यह घावो को भरने मे मदद करती है 
 * इसमे पुनरुदभवन की क्षमता होती है 

कोशिका दो प्रकार की होती है -

1 प्रोकैरियाटिक  कोशिका 

( नीलहरित शैवाल एवं बैक्टीरिया )

2  यूकैरियोटिक कोशिका

( मनुष्य , जीव जन्तुओं में )

Thursday, April 18, 2019

Humen Heart

मानव शरीर में सुविकसित हृदय पाया जाता हैं जो दोनों फेफड़ों के मध्य स्थित होता है । यह गुलाबी रंग का होता है 
जो कार्डिक पेशी का बना होता है । 





महत्वपूर्ण तथ्य :-

1॰ विश्व में सर्वप्रथम क्रिश्चन बर्नाल्ड ने हृदय का प्रत्यारोपण किया ।
2. भारत में डा० बेडू गोपाल ने हृदय का प्रत्यारोपण किया। 
3. मनुष्यों में हृदय , पुरुषो मे 300 ग्रा० और स्त्रियों में कुछ कम होता है ।
4. हृदय के दो भाग होते हैं -

1. आलिन्द

2. निलय

आलिन्द के दो भाग होते है -
दायाँ आलिन्द , बायाँ आलिन्द 
इसी प्रकार निलय के भी दो भाग होते हैं -
दायाँ  निलय , बायां निलय 

इस प्रकार हमारे हृदय मे चार कोष्ठ होते हैं

5. हमारा हृदय संक्वाकार होता है। 
दायें आलिन्द मे अशुद्ध रक्त होता है ।  
बाएँ आलिन्द मे शुद्ध रक्त होता है । 
हमारा हृदय कार्डिक पेशी का बना होता है ।
हृदय से फेफड़े मे अशुद्ध रक्त फ़ुफ्फुसीय धमनी लेकर जाती है ।